सफर के सजदे में

सूरज उगता है बस तेरे लिए ....... मौके , हिम्मत और उम्मीद लिए ...... ये सौगात है बस तेरे लिए .....

मंगलवार, 30 सितंबर 2008

हम तो लिखते हैं

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अमर उजाला में कविता छपने पर चेक प्राप्त हुआ , बरबस मन ने कुछ पंक्तियाँ लिख डालीं । कौन पैसों के लिए लिखता है हम ...
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सोमवार, 29 सितंबर 2008

सफर के सजदे में

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क्यों न हम अपने संवेदन शील मन को सृजन की डोर थमा दें । दुःख रात की तरह काला और अंतहीन , सृजन क़दमों को दिशा देता ,आशा का टिमटिमाता दिया। सृज...
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सोमवार, 22 सितंबर 2008

रोशन करना था दुनिया को

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इस दम को लगाना था और कहीं बिखरी दुनिया को सजाने में रोशन करना था दुनिया को दम लगा दिया बिखराने में आधार ये कैसा उठा लिया अपने मन को ...
मंगलवार, 26 अगस्त 2008

रूठा है कुछ मुझसे

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रूठा है कुछ मुझसे , मेरा ही अपना आप कहीं मेरा अपना ही हिस्सा है चलता जो मेरे साथ नहीं क्यों दूरी है ? हम कोई द...
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सोमवार, 25 अगस्त 2008

जीवन का पलड़ा भारी है

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हालातों से ,संघर्षों से तेरे मन के अंतर्द्वंदों से जीवन का पलड़ा भारी है भ्रमों से, विषादों से नीरवता के कोलाहल से जीवन का पलड़ा भारी...
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थकन लेकर

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वक़्त फिसल जाता है मुठ्ठी से बालू की तरह हिस्से कुछ नहीं आता हारे हुए प्यादे की तरह झुनझुनों से बहलेंगें तो बह जा...
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शुक्रवार, 22 अगस्त 2008

एक कदम दूर

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एक कदम तुम दूर थे इतनी बड़ी खाई न थी कि फुसफुसाने की आवाज़ भी न आती बस एक कदम और और तन्हाई सज सकती थी जाना मै...
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मेरे बारे में

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शारदा अरोरा
नैनीताल से रुद्रपुर और अब नोएडा
एक रिटायर्ड चार्टर्ड एकाउंटेंट बैंक एक्जीक्यूटिव अब प्रैक्टिस में ,की पत्नी , इंजिनियर बेटी, इकोनौमिस्ट बेटी व चार्टेड एकाउंटेंट बेटे की माँ , एक होम मेकर हूँ | कॉलेज की पढ़ाई के लिए बच्चों के घर छोड़ते ही , एकाकी होते हुए मन ने कलम उठा ली | उद्देश्य सामने रख कर जीना आसान हो जाता है | इश्क के बिना शायद एक कदम भी नहीं चला जा सकता ; इश्क वस्तु , स्थान , भाव, मनुष्य, मनुष्यता और रब से हो सकता है और अगर हम कर्म से इश्क कर लें ?मानवीय मूल्यों की रक्षा ,मानसिक अवसाद से बचाव व उग्रवादी ताकतों का हृदय परिवर्तन यही मेरी कलम का लक्ष्य है ,जीवन के सफर का सजदा है|
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