बुधवार, 7 अगस्त 2013

नींव हिलाते लोग मिले

कैसे-कैसे लोग मिले 
ऐसे वैसे लोग मिले 

इक भी मिला न मन का साथी 
ऐसे कैसे सँजोग मिले 

खेल रहे हैं जज़्बातों से  
तभी तो मन के रोग मिले 

दुनिया का दस्तूर तो देखो 
वफ़ा के बदले जोग मिले 

लुभावने चेहरों को लेकर 
मतलब से सारे लोग मिले 

देख लिया दुनिया को हमने 
सच्चे बन कर सोग मिले 

सच्चे दिल पर साहिब राजी 
बेशक अक्सर नींव हिलाते लोग मिले 




सोमवार, 29 जुलाई 2013

पानी पर तेरा चेहरा

पानी पर तेरा चेहरा
ख़्वाबों ने बनाया
कई कई बार ...
रँग हकीकत ही न भरने आई


चलती फिरती मूरत में
ईमान का रँग
थोड़ा ज्यादा होगा ...
वो शहजादा होगा
हसरत कहने आई

पकड़ के आयेगा जब वो
मेरे ख़्वाबों की उँगली
नाक-नक़्शे तस्वीर में
जी उट्ठेंगे ...
महक उट्ठेगा घर अँगना
खुशबू सी आई

रास्ता देख रही है कलम
दम साधे हुए हैं अल्फाज़
वो रुत आई कि आई ...

शनिवार, 2 अक्तूबर 2010

बुधवार, 17 जुलाई 2013

दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें

बेटे ने चार्टर्ड-एकाउनटेंट की फ़ाइनल परीक्षा डिस्टिंक्शन के साथ पास कर ली , मन बाग़-बाग़ हो उठा ....

दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें 

ये जो चाँद मुस्कराता है ,
आसमान सी ऊँचाइयाँ तुम्हें मिलें 

वो कौन सी डगर है ,
खिले हों फूल हर तरफ , अमराइयाँ तुम्हें मिलें 

गर धूप हो कहीं तो ,
ममता की छाँव सी , पुरवाइयाँ तुम्हें मिलें 

हीरा भी तो पत्थर ही है , 
तराश लो , कोहेनूर सी रश्मियाँ तुम्हें मिलें 

ज़िन्दगी खुद ही न्यामत है ,
सफलता है सोने पे सुहागा , हर बार तुम्हें मिले

चलो झूम लें सुरूर में , 
खुमार में , दुनियाँ-जहान की खुशियाँ तुम्हें मिलें 



रविवार, 7 जुलाई 2013

ये पूछ तू मेरे दिल से

छोटी बहन जैसी भांजी , सात जुलाई ...जन्म-दिन ...मन जैसा बोल रहा था वैसा ही लिख दिया ...

मेरी बहना ,तू किसी और ही मिट्टी की है 
किसी और ही दुनिया की है 
ये पूछ तू मेरे दिल से 

तेरी आँखों में हैं झिलमिल तारे 
तेरी बातोँ से महकता है समाँ 
तेरे आने से खिलता है रूहे-चमन 

वो बचपन की जमीं , मिट्टी की महक 
चल रही है आज भी मेरे साथ 
सीने से हूँ लगाये हुए 

तेरी आँखों में है इरादों की चमक 
तू जो चाहे तो झुठला दे सारी दुनिया 
ये आसमाँ भी झुके तेरे आगे उकडूँ हो कर 

तेरी राहों में बिछे हों फूल ,न हो नश्तर कोई 
ये दुआ पहुँचे तुझ तक , ठण्डी हवा बन कर 
दुनिया में चमके तू सितारा बन कर 

मेरी आवाज में सुनने के लिए यहाँ क्लिक कर सकते हैं ...
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शुक्रवार, 21 जून 2013

नामोँ-निशाँ न कल का

उत्तरा-खण्ड में हुई भारी तबाही से उपजी ये पंक्तियाँ ...

त्राहि-त्राहि कर उठा हिमालय ,
फटा है सीना धरती का 
केदार-नाथ , भगवान शिव की नगरी ,
और ताण्डव जल का 
किस्मत के आगे हर कोई हारा ,
कहाँ ठिकाना पल का 

शिव है आदि ,अन्त भी शिव ही 
एक अकेला शिव ही सत्य है 
एक प्रवाह में बहे सभी 
नामोँ-निशाँ न कल का 

ढह गईं इमारतें ताश के पत्तों सी 
लाया सैलाब है पत्थर ,लाशें ,
मौत का ताण्डव , उजड़ा मन 
और ज़िन्दगी सोच रही है 
अपने छूटे , सपने रूठे 
बेकस हाल है मन का 

टूटी छत है , पेट में दाना नहीं अन्न का 
ये तो बताओ , कहाँ है मरहम 
यादों के रिसते जख्मों का 
त्राहि-त्राहि कर उठा हिमालय ,
फटा है सीना धरती का 

गुरुवार, 30 मई 2013

ये लीची और आम के पेड़

ये आँगन में खड़े लीची और आम के पेड़  
झुक गईं हैं डालियाँ फलों के बोझ से 
बरसों से खड़े हैं राह तकते 
बोता है कोई और , खाता है कोई और 

जीते हैं हम अपने जतनों से 
पाते हैं सदा फल अपने कर्मों का 
फलदार हों , छायादार हों 
कौन आता है तेरे साये में पलने को 

दिल ने माँगा सदा पुराना 
ज़ेहन आगे देख न हारे 
नन्हें पौधे जवाँ हुए हैं 
और जवाँ दिल हुए हैं बूढ़े 
झुक-झुक आई हैं डालियाँ 
धरती से कुछ कहती हुईं 
हजारों मील दूर है कोई 
मिट्टी की महक को सीने से लगाये हुए 
कोई कैसे है इन नजारों को भुलाये हुए 

रविवार, 12 मई 2013

माँ वो हस्ती है

माँ वो हस्ती है जिसे ,यादों से मिटाना नामुमकिन 
जमीं पर चलाती है जो उँगली पकड़ , 
आसमाँ ओढ़ाती है दुआओं का जो ज़िन्दगी भर 

अहसास की खुशबू है 
अनमोल सा रिश्ता है 
आराम की छाया है 
हर नींव में मुस्कराती है वो 

दामन काँटों से भरा 
फूलों सा सहलाती हर दम 
हस्ती गँवा कर भी 
हर सू नजर आती है वो