खिलौना बन गये वहशत की ताकतों का
अपना जमीर सुला दिया , मजहब का मतलब ग़लत उठा लिया
बेशकीमती है ये , जिन्दगी को क्यों गिरा दिया
मशीनी इंसान की तरह , कहर क्यों बरपा दिया
तेरा लहू लहू है , क्या उसका लहू पानी है
जब न होगी जिन्दगी , कैसे देखेगा अपने जनाजे के बाराती
सेहरा तेरा छलावा है , कफ़न लिए खड़े हैं , मोहरे बने तेरे साथी
अपनी कब्र खोद कर , ख़ुद ही कदम बढाया है
जो पाक-साफ़ है तो छुप कर के क्यों आया है
जो बो रहा है वही फसल तो काटेगा
कैसी शहादत है , दो गज जमीन को तरसे
खिलौना बन गया , कमान तेरी दूसरों के हाथ है
चलता है तू जैसे रोबोट , माथे में बजते टेप के साथ है
वही तो पाते हैं न्यामतें , जिंदा हैं जिनकी रूहें ,इन्सानी से जज्बों के संग
चिराग बुझाए बैठे हो , उजाले का वहम पाल के ,
चलोगे कैसे इतने अंधेरों के संग
अपना जमीर सुला दिया , मजहब का मतलब ग़लत उठा लिया
बेशकीमती है ये , जिन्दगी को क्यों गिरा दिया
मशीनी इंसान की तरह , कहर क्यों बरपा दिया
तेरा लहू लहू है , क्या उसका लहू पानी है
जब न होगी जिन्दगी , कैसे देखेगा अपने जनाजे के बाराती
सेहरा तेरा छलावा है , कफ़न लिए खड़े हैं , मोहरे बने तेरे साथी
अपनी कब्र खोद कर , ख़ुद ही कदम बढाया है
जो पाक-साफ़ है तो छुप कर के क्यों आया है
जो बो रहा है वही फसल तो काटेगा
कैसी शहादत है , दो गज जमीन को तरसे
खिलौना बन गया , कमान तेरी दूसरों के हाथ है
चलता है तू जैसे रोबोट , माथे में बजते टेप के साथ है
वही तो पाते हैं न्यामतें , जिंदा हैं जिनकी रूहें ,इन्सानी से जज्बों के संग
चिराग बुझाए बैठे हो , उजाले का वहम पाल के ,
चलोगे कैसे इतने अंधेरों के संग


